मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

[ कहानी]:- न्यायी बादशाह

जहाँगीर दिल्ली का बादशाह था | वह अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध था | नूरजहाँ जहाँगीर की प्रिय बेगम थी |               एक बार नूरजहाँ अपनी सखियों के साथ जंगल में शिकार खेेेलने  गई थी | एक नदी बहती थी | नदी के किनारे एक धोबी कपड़े धो रहा था | नूरजहाँ ने एक हिरन को नदी सेेेे पानी पीते हुए देखा | उसने हिरन की तरफ बंदूक का निशाना  साधा और गोली छोड़ दी | हिरन तो भाग गया, लेकिन दुर्भाग्य से गोली धोबी को लगी और वह मर गया | 
                  दुसरे दिन विधवा धोबिन बादशाह जहाँगीर के दरबार में न्याय माँगने गई | उसने बेगम नूरजहाँ पर अपने पति की हत्या करने का आरोप लगाया | जाॅच-पडताल के बाद बादशाह सारा मामला समझ गया |
                    बादशाह बडी़ दुविधा में पड़ गया | एक ओर बेगम थी, तो दुसरी ओर न्याय | बादशाह ने बहुत सोच- विचार किया | अंत में न्याय की जीत हुई | उसने धोबिन के हाथ में एक बंदूक दी और कहा, "जैसे मेरी बेगम ने तुम्हारे पति को मारकर तुम्हें विधवा बनाया है, वैसे ही तुम मुझे मारकर मेरी बेगम को विधवा बना दो | तुम बेखटके मुझ पर गोली चलाओ |"
             धोबिन बादशाह के इस न्याय पर सन्न रह गई | उसने बेगम को क्षमा कर दिया | 
        सीख :- सचमुच, जो न्याय निष्पक्ष होता है, वही सच्चा न्याय है | ...... 

Dr. Babasaheb Ambedkar.

          Was born on 14th April 1891 in the town and military cantonment of mhow (now Dr. Ambedkar nagar) in madhya Pradesh. He got his deg...