दुसरे दिन विधवा धोबिन बादशाह जहाँगीर के दरबार में न्याय माँगने गई | उसने बेगम नूरजहाँ पर अपने पति की हत्या करने का आरोप लगाया | जाॅच-पडताल के बाद बादशाह सारा मामला समझ गया |
बादशाह बडी़ दुविधा में पड़ गया | एक ओर बेगम थी, तो दुसरी ओर न्याय | बादशाह ने बहुत सोच- विचार किया | अंत में न्याय की जीत हुई | उसने धोबिन के हाथ में एक बंदूक दी और कहा, "जैसे मेरी बेगम ने तुम्हारे पति को मारकर तुम्हें विधवा बनाया है, वैसे ही तुम मुझे मारकर मेरी बेगम को विधवा बना दो | तुम बेखटके मुझ पर गोली चलाओ |"
धोबिन बादशाह के इस न्याय पर सन्न रह गई | उसने बेगम को क्षमा कर दिया |